Home / Uttar Pradesh / दिनांक: 17अक्टूबर 2026 दिन शनिवार को गोमती नगर विस्तार ग्रीनवुड अपार्टमेंट स्थित मां सिद्धेश्वरी दुर्गा मंदिर प्रांगण में नवरात्रि के पावन पर्व सप्तमी मां कालरात्रि के पावन दर्शन हेतु पूजा पार्क पर एक शाम माँ के नाम का आयोजन किया गया

दिनांक: 17अक्टूबर 2026 दिन शनिवार को गोमती नगर विस्तार ग्रीनवुड अपार्टमेंट स्थित मां सिद्धेश्वरी दुर्गा मंदिर प्रांगण में नवरात्रि के पावन पर्व सप्तमी मां कालरात्रि के पावन दर्शन हेतु पूजा पार्क पर एक शाम माँ के नाम का आयोजन किया गया

मुख्य यजमान की भूमिका ए ब्लाक से श्रीमती रीता कपूर आरती कन्नौजिया

बी ब्लाक से कंचन त्रिपाठी कंचन गुप्ता शिखा कटियार पुष्पा शर्मा अर्चना मिश्रा

व के ब्लाक की रोमा श्रीवास्तव ने निभाई

व समस्त निवासियों द्वारा शारदीय नवरात्रि के पावन पर्व के सातवें दिन, कालरात्रि की उपासना हेतु महिलाओं द्वारा संध्या भजन कीर्तन आरती का आयोजन किया गया

ढोलक मंजीरा और तालियो से प्रांगण गूंज उठा धार्मिक मान्यताओं के अनुसार,

और पूरी आस्था विश्वास से मां के चरणों में समर्पित होकर पौराणिक सनातन परंपरा का संदेश भी दिया

इस कार्यक्रम में उपस्थित सैकड़ो महिलाओं ने भाग लिया जिसमें सुमन निगम रिचा सिंह लता श्रीवास्तव कंचन त्रिपाठी पुष्पा रेनू सिंह रूमा मीना सिंह सीमा सिंह ममता तिवारी किरन वर्मा वंदना सिंह शिखा कटियार सीमा गांधी पूनम सिंह रचना सहगल निमिषा निगम मीनू रुचिका सरिता स्नेहा अंजलि सुनीता अनीता सिंह आदि उपस्थित रही

मीडिया से वार्ता के दौरान के ब्लाक की रोमा श्रीवास्तव ने माँ कालरात्रि के रूप और गुण की जानकारी देते हुए बताया

कि शारदीय नवरात्रि के सातवें दिन आज श्रद्धा, शक्ति और सकारात्मक ऊर्जा के साथ आदिशक्ति माँ भगवती के सप्तम स्वरूप माँ कालरात्रि की पूजा-अर्चना पारंपरिक हर्षोल्लास के साथ हम लोगों ने संपन्न की कतारबद्ध होकर माता के उग्र व कल्याणकारी स्वरूप का दर्शन किया और परिवार की सुख, शांति व समृद्धि की कामना की

श्रीमती रोमा श्रीवास्तव ने बताया कि
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, माँ कालरात्रि को सभी बाधाओं, दुष्ट शक्तियों और भय का नाश करने वाली देवी माना गया है। इनका स्वरूप भले ही अत्यंत उग्र और विकराल है, लेकिन ये अपने भक्तों को सदैव शुभ फल प्रदान करती हैं, जिसके कारण इन्हें ‘शुभंकरी’ भी कहा जाता है। पौराणिक कथाओं के अनुसार, असुर रक्तबीज का संहार करने के लिए माता ने यह स्वरूप धारण किया था। तंत्र साधना और सामान्य पूजा दोनों ही दृष्टियों से महासप्तमी की रात्रि (कालरात्रि) का विशेष महत्व माना गया है।
श्रीमती रोमा ने यह भी बताया
आज के दिन मंदिरों और घरों में विशेष रूप से माता को गुड़ या गुड़ से बने पकवानों का भोग लगाया जाता है लाल चंदन या रुद्राक्ष की माला से माता के सिद्ध मंत्रों का जाप किया जाता है
विशेष तौर पर”या देवी सर्वभूतेषु माँ कालरात्रि रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः॥”करने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती है

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