लोकनिर्माण विभाग (PWD) मुख्यालय में एक सजायाफ्ता बाबू के नौकरी करने का मामला सामने आया है, जिसने विभागीय व्यवस्था और नियमों पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।सूत्रों के अनुसार, संबंधित बाबू पर वर्ष 2012 में विभाग के ही अन्य बाबुओं के साथ मारपीट और जानलेवा हमले का आरोप लगा था। इस मामले में उसके खिलाफ थाना हजरतगंज में मुकदमा संख्या 10545/2012 दर्ज किया गया था।मामले की सुनवाई मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट, लखनऊ की अदालत में हुई, जहां सुनवाई के दौरान आरोपी बाबू ने अपना जुर्म स्वीकार कर लिया। अदालत ने उसे सजा सुनाते हुए जुर्माना अथवा जेल का विकल्प दिया, जिसमें आरोपी ने जुर्माना अदा कर सजा पूरी की।इस पूरे प्रकरण पर इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक वरिष्ठ अधिवक्ता ने बताया कि“कोई भी सजायाफ्ता व्यक्ति सरकारी सेवा में बने रहने का पात्र नहीं होता, चाहे सजा जुर्माने की ही क्यों न हो।”इसके बावजूद संबंधित बाबू का PWD मुख्यालय में कार्यरत रहना, विभागीय अधिकारियों की भूमिका पर भी सवाल खड़े करता है।अब सबसे बड़ा सवाल यह है कि—क्या विभाग ने कोर्ट के आदेश और सेवा नियमों की अनदेखी की?या फिर किसी प्रभावशाली संरक्षण में नियमों को ताक पर रखा गया?Live News X जल्द ही इस पूरे मामले से जुड़े दस्तावेज़, जिम्मेदार अधिकारियों और नियमों की हकीकत के साथ बड़ा खुलासा करेगा।
लोक निर्माण विभाग मुख्यालय लखनऊ में सजायाफ्ता बाबू की तैनाती पर बड़ा सवाल






